माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है... ..
मेरे बचपन के कुछ पुराने कपड़ों में
उसको अपनेपन से सज़ा कर..
उसकी आँखों की चमक में
उसकी आवाज़ की चहक में
अपनी ही मासूम सी परछाईं को बसा कर ... ..
माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है ... ..
प्यार भेजा है , सम्मान भेजा है
मेरे छुटपन के सपनों का सामान भेजा है
एक खिलखिलाती हुई हंसी का पिटारा भेजा है
जो खुलते ही उजला हर मन कर देता है ... ..
माँ ने मेरी आवारगी- बेपरवाही में
सेंध लगा के रखने को
एक ज़िम्मेदारी का एहसास भेजा है ... ..
एक सोने की बाली भेजी है,
नाक की नथ , कुछ नए कपड़े भेजे हैं
मेरे फैशन वाले शौक से ले कर
ज़रूरत तक का इंतज़ाम भेजा है ... ..
माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है ... ..
याद है मुझे , कुछ रोज़ पहले ,
यूँ ही माँ से इसरार किया था
इस दूर देश में अकेले होने की शिकायत जताई थी
तभी माँ ने मुझे ये अपनेपन का उपहार भेजा है ... ..
कुछ मठरी - नमकीन भेजी है ,
दशेहरी आम की चाशनी में मिला कर
मेरे अकेलेपन के खातिर -
ये मीठी दवा की पुड़िया भेजी है ... ..
माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है ... ..
माँ ने बोलती हुई एक
" चंदा की कटोरी" भेजी है ,
तन्हा रातों में नींद दिलाती हुई ,
एक बेहद सुरीली "लोरी" भेजी है ... ..
ऐसी ज़िन्दगी की भीड़ में ,
जब लोग अक्सर खुद को खो देते हैं
माँ ने मेरे बचपन की मेरी,
मासूमियत वाली तस्वीर भेजी है ... ..
माँ खुद नहीं आ पाई ,
तो गुड़िया के मोह में
अपने निश्छल ममता का
स्वरुप भेजा है ... ..
जिसको मैंने भगवान् से दुआओं में माँगा था
अपनी पीठ पे बिठा के सैर कराती थी
फटकारा , दुलारा , सिखाया
नाजों से जिसकी हिफाज़त की थी ... ..
माँ ने फिर से -
वही मेरी बचपन वाली गुड़िया भेजी है !!

मेरे बचपन के कुछ पुराने कपड़ों में
उसको अपनेपन से सज़ा कर..
उसकी आँखों की चमक में
उसकी आवाज़ की चहक में
अपनी ही मासूम सी परछाईं को बसा कर ... ..
माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है ... ..
प्यार भेजा है , सम्मान भेजा है
मेरे छुटपन के सपनों का सामान भेजा है
एक खिलखिलाती हुई हंसी का पिटारा भेजा है
जो खुलते ही उजला हर मन कर देता है ... ..
माँ ने मेरी आवारगी- बेपरवाही में
सेंध लगा के रखने को
एक ज़िम्मेदारी का एहसास भेजा है ... ..
एक सोने की बाली भेजी है,
नाक की नथ , कुछ नए कपड़े भेजे हैं
मेरे फैशन वाले शौक से ले कर
ज़रूरत तक का इंतज़ाम भेजा है ... ..
माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है ... ..
याद है मुझे , कुछ रोज़ पहले ,
यूँ ही माँ से इसरार किया था
इस दूर देश में अकेले होने की शिकायत जताई थी
तभी माँ ने मुझे ये अपनेपन का उपहार भेजा है ... ..
कुछ मठरी - नमकीन भेजी है ,
दशेहरी आम की चाशनी में मिला कर
मेरे अकेलेपन के खातिर -
ये मीठी दवा की पुड़िया भेजी है ... ..
माँ ने मेरे लिए एक गुड़िया भेजी है ... ..
माँ ने बोलती हुई एक
" चंदा की कटोरी" भेजी है ,
तन्हा रातों में नींद दिलाती हुई ,
एक बेहद सुरीली "लोरी" भेजी है ... ..
ऐसी ज़िन्दगी की भीड़ में ,
जब लोग अक्सर खुद को खो देते हैं
माँ ने मेरे बचपन की मेरी,
मासूमियत वाली तस्वीर भेजी है ... ..
माँ खुद नहीं आ पाई ,
तो गुड़िया के मोह में
अपने निश्छल ममता का
स्वरुप भेजा है ... ..
जिसको मैंने भगवान् से दुआओं में माँगा था
अपनी पीठ पे बिठा के सैर कराती थी
फटकारा , दुलारा , सिखाया
नाजों से जिसकी हिफाज़त की थी ... ..
माँ ने फिर से -
वही मेरी बचपन वाली गुड़िया भेजी है !!


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