Wednesday, 22 August 2018

बाज़ दफा ...

एक ये दिन हैं कि  सब कुछ कर जाने को जी करता है
बाज़ दफा सांस लेने भर से थकान हो जाती है।

कभी तो वादे सालों तलक के किये बैठे हैं
बाज़ दफा अगले लम्हे का भी भरोसा नहीं रहता।

कभी तो अजनबियों को भी हाल-ए -दिल सुना बैठते हैं
बाज़ दफा अपने मन से गुफ़्तगू मुनासिब नहीं जान पड़ती।


यूँ तो मुसाफिरों से रहबरी की ख़्वाहिश नहीं करनी होती
बाज़ दफा रहबर भी अजनबी मालूम हों तो क्या करें ?

कभी अपने हाथों से दीवार पे परछाईं में जानवर बनाते हैं
बाज़ दफा खुद का साया भी स्याह रातों  मनहूस जान पड़ता है।

कभी तो आरज़ू की गर्मी से लफ्ज़ मोम से पिघल गिरते हैं
बाज़ दफा दिल में जमी बर्फ से स्याही तक सूख जाती है।

~Kinksha

पर मैं तुम सी नहीं हूँ !!

मैं ज़िद्दी हूँ , मैं हठी हूँ
मैं कठोर और  नकचढ़ी हूँ
पर तुम सी नहीं हूँ !!

मैं गुस्सैल हूँ , प्रतिशोधी हूँ ,

ईर्ष्यालु और झगड़ालू हूँ
 पर मैं तुम सी नहीं हूँ  !!

मैं नादाँ हूँ , नासमझ हूँ

कीचड़ हूँ , पंकज हूँ
अज्ञान हूँ , असहज हूँ
 पर मैं तुम सी नहीं हूँ  !!

मैं हाज़िर जवाब , नौटंकीबाज़ हूँ

निर्देशित और निर्देशक हूँ 
अल्हड़ जंगल की घास भी हूँ
दुर्लभ फूल पलाश भी हूँ
 पर मैं तुम सी नहीं हूँ  !!


मैं अर्जुन हूँ, दुर्योधन भी 
पांचाली और शिखंडी भी 
हूँ अग्नि-परीक्षित सीता भी 
और वचन-बद्ध - गीता भी 
हूँ कालीमिर्च और धनिया भी 
आर्केस्ट्रा की नचनिया भी 
फिर भी, मैं तुम सी नहीं हूँ !! 

मैट्रिक्स का मायाजाल भी हूँ

सिद्धार्थ के आत्म-बोध का ज्ञान भी हूँ
Bond-007 भी हूँ , Despicable like Gruu भी हूँ
पर फिर भी, मैं तुम सी नहीं हूँ !!

नकली गहने पहनती हूँ

स्ट्रीट शॉपिंग का शौक रखती हूँ
software में नौकरी करती हूँ
काल्पनिक लोक में रहती हूँ
पर फिर भी, मैं तुम सी नहीं हूँ !!

   

                            क्यों की मैं ज़िंदा हूँ और तुम सब बुत्त
                            मैं वो हर्फ़ हूँ जो हर शह एक नयी दास्तान है
                            और तुम सब ??
                            बस मुँहबोली परियों की कहानियां !! 

इसलिए, मैं तुम सी नहीं हूँ !!


~Kinksha


Friday, 20 July 2018

Every farewell remind us of the partings we had in past, so does the genotype!

Every farewell remind us of the partings we had in past.
Every great friendship we happen to find makes us remember the first ones we had. 
Every heartbreak and its pain reminds us of its foregone memories.
Every injury brings back the magnitude of pain engraved in our conscience whether or not we accept it.
Each emotion, each outburst and each relationship is carved out of its morphs we had in our experience.
We inherit everything, very attribute since evolution from something or someone just as the genotype!