Wednesday, 24 August 2016

I know !!

                I know, I know.

I know, you're tired but still can't stop.

I know, you're lost but zest gotta sought .
I know, you lust the sleep, but keep walking with smile.
I know, you're weak in the knees, just walk an extra mile.

I know, the burden is too heavy for your tiny hands.

I know, you can pick them up, like you always had.
I know, your enemies are smart & too many.
I know, you're no less clever or brave to any.

I know, the sun is scorching & your skin is soft

I know, you can't swim but surely can fix a raft.
I know, not a machine you're well of emotions
I know, you're a survivor sail in the storm of oceans.

I know you're wild, parallel dimensional & infinite.

I know, you accept your wrongs just to make them right.
I know, you can't go humble in this fierce night.
I know, you'll take the ride though afraid of heights.

I know you live full & full is your love.

I know, you're free, pure & beautiful as dove.
I know, you could be simply-soft or hell of tough.
I know, you know yourself & that's enough !

Becoz -- I know.

                 I know & I know & that's it !!
                 PERIOD.

Thursday, 11 August 2016

सच, कुछ भी तो नहीं बदला है , गुड़िया रानी

सच, कुछ भी तो नहीं बदला है

तुम आज भी मेरे लिए अपने  हिस्से के
 चॉकलेट्स बचा के लाती  हो
मैं भी तुम्हारे लिए  'मैसोर  पाक '
'पेड़े' लाती  हूँ  - ऑफिस से। 

रात को सोने के बाद,
 तुम आज भी चादर फेंक देती हो
और मैं तुम्हें अब भी,
डांट के रोज़ ओढ़ाती  रहती हूँ। 

                   हाँ , बस हमारे पेशे ज़रूर बदल गए हैं

मैं तुम्हारे केमिस्ट्री के सवाल हल नहीं कर पाती 
और तुम मुझसे सॉफ्टवेर के फंडे नहीं डिसकस कर पाती
तुमको टैक्सेज  समझ नहीं आते
और मुझे इंवेस्टमेंट्स सोचनी पड़ती है।
            
                                   पर हम आज भी शेर-ओ-शायरी, लिटरेचर , 
                                  गाने और डांस के सब्जेक्ट साथ में पढ़ लेते हैं

मुझे अब फ़ैशन का शौक़ है,
स्टाइलिश कपडे अच्छे लगते हैं
तुम अब भी मेरे खरीदे  हुए
शालीन कपड़ों में खुश रहती हो। 

                              पर जब हम साथ में घूमना हो
                               दोनों बेब बन के ही निकलते हैं              

तुम अब भी उतनी ही मासूम ,पाक. ,
दुनियादारी से अनछुई  हो
और मैं -  अब रम  गई हूँ
पूरी तरह से इस जंजाल में।।
                     
                                   पर मैं आज भी अपनी सीख और डाँट  से नवाज़ती रहती हूँ तुम्हें , 
                                    क्या पता कब ज़रूरत पड़ जाये

मैं अब भी चिंता करती हूँ तुम कहाँ , कैसी हो
और आज भी मेरी पूँछ बन कर ही चलती हो
कभी तुम दीदी बन जाती हो
तो कभी मैं छोटी हो जाती हूँ

हो सकता है और भी लोग आ गए हों  मेरी ज़िन्दगी में
मैं पहले से काफी बदल गई हूँ, लिबरल हो गई हूँ
हो सकता है मेरा वक़्त , मेरा प्यार थोड़ा बंटा सा लगे तुम्हें
पर तुम्हारा प्यार और तुम्हारा स्थान वहीँ है , वहीँ रहेगा
                                
                            पर एक चीज़ तो नहीं बदलेगी                            
                           माँ की सगी बच्ची तो मैं ही रहूंगी  -  हमेशा !! :  )  :-P

सच, कुछ भी तो नहीं बदला है , गुड़िया रानी !!