Saturday, 3 August 2019

झील के किनारे पर समंदर लिए खड़ा हूँ !!

झील के किनारे पर समंदर लिए खड़ा हूँ
मैं अनगनत "ख्वाहिशें" मेरे अंदर लिए बढ़ा हूँ  !!

अनकही बातों का एक जखीरा ठहरा हुआ है
मैं बर्दाश्त का मुसाफ़िरख़ाना बना फिरा हूँ !!

आजमाइशों की इस तूफानी शाम में
मैं न हार मानने का संकल्प लिए चला हूँ  !!

रफ़्तार से  निकलती हैं गाड़ियां जिन सड़कों से ,
मैं  उनके फुटपाथ पर एक दरख़्त का ठहराव लिए खड़ा हूँ !

नफरतों से जूझ रही है जो सरज़मीं आज कल ,
मैं मोहब्बत की एक नन्ही दलील लिए लड़ा  हूँ !!

लम्हों के कोरे कागज़ो की डायरी में ,
मैं तज़ुर्बे की स्याही में सराबोर - "हर्फ़े" लिख रहा हूँ  !!

झील के किनारे पर समंदर लिए खड़ा हूँ
मैं अनगनत "ख्वाहिशें" मेरे अंदर लिए बढ़ा हूँ  !!

~Kinksha

Thursday, 6 June 2019

तुम भी दुनिया हो !!

मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको  
तो दुनिया हो तुम  .. 
मेरी बस अच्छाइयां ही भातीं हैं तुमको  .. 
तो दुनिया हो तुम !!

मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको  
तो दुनिया हो तुम  !!

      
                          जो मैं अपनी "इन्सिक्युरिटीज " भी ज़ाहिर तुमसे न कर सकूँ .. 
                         हर बात बोलने से पहले कई बार तौल लूँ  .. 
                         जो मेरी 'वल्नरेबिलिटी' को कमज़ोरी मान बैठे  हो .. 
                        तो दुनिया हो तुम !! 

                            मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको  

                            तो दुनिया हो तुम  !!


मैं जब यूँ ही अपने विचार बुद -बुदा रहा था  .. 

'थिंकिंग आउट लॉउड ' तेरे साथ आज़मा रहा था   .. 
मेरी पारदर्शिता को बस अनियंत्रण समझ पाए हो .. 
तो दुनिया हो तुम !! 

मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको  

तो दुनिया हो तुम  !!


                           हर ग़म तुम्हारा वाजिब , हर दुःख हमारा सतही ?

                          जज़्बात मेरे ओछे,  सब राग तेरे सच्चे ?
                          मेरे टूट के बिखरने का - जो मौज ले सके  हो ...
                          तो दुनिया हो तुम !! 

                            मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको  
.. 

                            तो दुनिया हो तुम  !!


मेरी कहानियां तुमको बचकानी जान पड़तीं  

एक तुम्हारा वर्णन ही -यथार्थ मान बैठे  .. 
हो मेरे संघर्ष से तुम जो हास्य व्यंग रचते  .. 
तो दुनिया हो तुम  !!

 मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको  

तो दुनिया हो तुम  !!



                             तो मेरे भाई , बंधू, मालिक ,सखा  

                          ये अपनेपन का ढोंग अब बंद भी करो  .. 
                          परिवार तो बन नहीं सकते हो   ..  
                          बस एक जानकार ही बने रहो !

दुनिया हो तुम और बस दुनिया ही बन कर रहो  !!

                                    ~ Kinksha