झील के किनारे पर समंदर लिए खड़ा हूँ
मैं अनगनत "ख्वाहिशें" मेरे अंदर लिए बढ़ा हूँ !!
अनकही बातों का एक जखीरा ठहरा हुआ है
मैं बर्दाश्त का मुसाफ़िरख़ाना बना फिरा हूँ !!
आजमाइशों की इस तूफानी शाम में
मैं न हार मानने का संकल्प लिए चला हूँ !!
रफ़्तार से निकलती हैं गाड़ियां जिन सड़कों से ,
मैं उनके फुटपाथ पर एक दरख़्त का ठहराव लिए खड़ा हूँ !
नफरतों से जूझ रही है जो सरज़मीं आज कल ,
मैं मोहब्बत की एक नन्ही दलील लिए लड़ा हूँ !!
लम्हों के कोरे कागज़ो की डायरी में ,
मैं तज़ुर्बे की स्याही में सराबोर - "हर्फ़े" लिख रहा हूँ !!
झील के किनारे पर समंदर लिए खड़ा हूँ
मैं अनगनत "ख्वाहिशें" मेरे अंदर लिए बढ़ा हूँ !!
~Kinksha
मैं अनगनत "ख्वाहिशें" मेरे अंदर लिए बढ़ा हूँ !!
अनकही बातों का एक जखीरा ठहरा हुआ है
मैं बर्दाश्त का मुसाफ़िरख़ाना बना फिरा हूँ !!
आजमाइशों की इस तूफानी शाम में
मैं न हार मानने का संकल्प लिए चला हूँ !!
रफ़्तार से निकलती हैं गाड़ियां जिन सड़कों से ,
मैं उनके फुटपाथ पर एक दरख़्त का ठहराव लिए खड़ा हूँ !
नफरतों से जूझ रही है जो सरज़मीं आज कल ,
मैं मोहब्बत की एक नन्ही दलील लिए लड़ा हूँ !!
लम्हों के कोरे कागज़ो की डायरी में ,
मैं तज़ुर्बे की स्याही में सराबोर - "हर्फ़े" लिख रहा हूँ !!
झील के किनारे पर समंदर लिए खड़ा हूँ
मैं अनगनत "ख्वाहिशें" मेरे अंदर लिए बढ़ा हूँ !!
~Kinksha
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