मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम ..
मेरी बस अच्छाइयां ही भातीं हैं तुमको ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
जो मैं अपनी "इन्सिक्युरिटीज " भी ज़ाहिर तुमसे न कर सकूँ ..
हर बात बोलने से पहले कई बार तौल लूँ ..
जो मेरी 'वल्नरेबिलिटी' को कमज़ोरी मान बैठे हो ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
मैं जब यूँ ही अपने विचार बुद -बुदा रहा था ..
'थिंकिंग आउट लॉउड ' तेरे साथ आज़मा रहा था ..
मेरी पारदर्शिता को बस अनियंत्रण समझ पाए हो ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
हर ग़म तुम्हारा वाजिब , हर दुःख हमारा सतही ?
जज़्बात मेरे ओछे, सब राग तेरे सच्चे ?
मेरे टूट के बिखरने का - जो मौज ले सके हो ...
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरी कहानियां तुमको बचकानी जान पड़तीं
एक तुम्हारा वर्णन ही -यथार्थ मान बैठे ..
हो मेरे संघर्ष से तुम जो हास्य व्यंग रचते ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
तो मेरे भाई , बंधू, मालिक ,सखा
ये अपनेपन का ढोंग अब बंद भी करो ..
परिवार तो बन नहीं सकते हो ..
बस एक जानकार ही बने रहो !
दुनिया हो तुम और बस दुनिया ही बन कर रहो !!
~ Kinksha
तो दुनिया हो तुम ..
मेरी बस अच्छाइयां ही भातीं हैं तुमको ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
जो मैं अपनी "इन्सिक्युरिटीज " भी ज़ाहिर तुमसे न कर सकूँ ..
हर बात बोलने से पहले कई बार तौल लूँ ..
जो मेरी 'वल्नरेबिलिटी' को कमज़ोरी मान बैठे हो ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
मैं जब यूँ ही अपने विचार बुद -बुदा रहा था ..
'थिंकिंग आउट लॉउड ' तेरे साथ आज़मा रहा था ..
मेरी पारदर्शिता को बस अनियंत्रण समझ पाए हो ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
हर ग़म तुम्हारा वाजिब , हर दुःख हमारा सतही ?
जज़्बात मेरे ओछे, सब राग तेरे सच्चे ?
मेरे टूट के बिखरने का - जो मौज ले सके हो ...
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरी कहानियां तुमको बचकानी जान पड़तीं
एक तुम्हारा वर्णन ही -यथार्थ मान बैठे ..
हो मेरे संघर्ष से तुम जो हास्य व्यंग रचते ..
तो दुनिया हो तुम !!
मेरे गिरने पर अगर, हंसी आती है तुमको
तो दुनिया हो तुम !!
तो मेरे भाई , बंधू, मालिक ,सखा
ये अपनेपन का ढोंग अब बंद भी करो ..
परिवार तो बन नहीं सकते हो ..
बस एक जानकार ही बने रहो !
दुनिया हो तुम और बस दुनिया ही बन कर रहो !!