तू अकेला है , तेरे साथ है बस तू
रिश्तों के ये स्वांग
कितने भी रचा ले तू ।
तुझे तो याद ही होगा ,
वो जब थोकर से गिरे थे तुम
तरस की नज़र भर थी, ना हाथ संबल का
तू अकेला है , की जब शाम ढलते ही
तेरे द्वंद्व की आंधी पुरज़ोर चलती थी
उपहास तेरी उलझनों का सबने उड़ाया था।
याद है ना जब तुझे , उसके सहारे की ज़रूरत थी
वह मुह फुलाए बैठ कर
तंज़ तुझ पे ही कसता था ।
तू अकेला है , जब तूने दिया सब कुछ ,
ओछे नामों से चरित्र-हीन कह ,
उसने पुकारा था।
तू अकेला है , तो अब उदास क्यों है तू ?
तू जानता है न आ, यूँ ही हुआ हरदम
जब भी दिलासे की तुझको ज़रूरत थी।
तू अकेला है , जब ये जानता है तू
तो फिर टूटा हुआ मन का,
है आशियाना क्यों ?
तू अकेला है , तो अब क्यों आस है बाकी ?
समझेगा कभी जिसने
चरित्र तेरा नहीं जाना
तू अकेला है , तो धुल जाने दे अश्रु में
जो औरों पे रखे तूने
विश्वास बाक़ी थे।
तू अकेला है ,
दर्द, " उम्मीदों " से मिलते हैं
ये जानता है तू !
रिश्तों के ये स्वांग
कितने भी रचा ले तू ।
तुझे तो याद ही होगा ,
वो जब थोकर से गिरे थे तुम
तरस की नज़र भर थी, ना हाथ संबल का
तू अकेला है , की जब शाम ढलते ही
तेरे द्वंद्व की आंधी पुरज़ोर चलती थी
उपहास तेरी उलझनों का सबने उड़ाया था।
याद है ना जब तुझे , उसके सहारे की ज़रूरत थी
वह मुह फुलाए बैठ कर
तंज़ तुझ पे ही कसता था ।
तू अकेला है , जब तूने दिया सब कुछ ,
ओछे नामों से चरित्र-हीन कह ,
उसने पुकारा था।
तू अकेला है , तो अब उदास क्यों है तू ?
तू जानता है न आ, यूँ ही हुआ हरदम
जब भी दिलासे की तुझको ज़रूरत थी।
तू अकेला है , जब ये जानता है तू
तो फिर टूटा हुआ मन का,
है आशियाना क्यों ?
तू अकेला है , तो अब क्यों आस है बाकी ?
समझेगा कभी जिसने
चरित्र तेरा नहीं जाना
तू अकेला है , तो धुल जाने दे अश्रु में
जो औरों पे रखे तूने
विश्वास बाक़ी थे।
तू अकेला है ,
दर्द, " उम्मीदों " से मिलते हैं
ये जानता है तू !