सौ बार बिखरा, जा कर फिर बना है
हमारा ये रिश्ता "ज़िन्दगी" से सना है ।
डूबे हैं - साँसों से हार कर,
उबरे भी तो , तेरी साँसों को थाम कर ।
तरसे भी हैं तेरे पाश के लिए
झगड़े भी हैं - दूर जाना है ।
चाहें भी थे - अधिकार तुमको दें
शिकायतें करीं, जब अधिकृत किये गए ।
आज़ाद उड़ानें भरनी है ,
मेरे आसमां का विस्तार तुम तक हो ।
भ्रम भी लगी है ज़िन्दगी,
कभी सत्य - सार प्रेम ही ।
कभी मोह में थी लिप्त भी ,
कभी बुद्ध की विरक्ति सी ।
खुद से उबरने का भी तो ,
रास्ता भी तुम से है बना ।
सौ बार बिखरा, फिर बना
है ये रिश्ता - "ज़िन्दगी " से सना ।

हमारा ये रिश्ता "ज़िन्दगी" से सना है ।
डूबे हैं - साँसों से हार कर,
उबरे भी तो , तेरी साँसों को थाम कर ।
तरसे भी हैं तेरे पाश के लिए
झगड़े भी हैं - दूर जाना है ।
चाहें भी थे - अधिकार तुमको दें
शिकायतें करीं, जब अधिकृत किये गए ।
आज़ाद उड़ानें भरनी है ,
मेरे आसमां का विस्तार तुम तक हो ।
भ्रम भी लगी है ज़िन्दगी,
कभी सत्य - सार प्रेम ही ।
कभी मोह में थी लिप्त भी ,
कभी बुद्ध की विरक्ति सी ।
खुद से उबरने का भी तो ,
रास्ता भी तुम से है बना ।
सौ बार बिखरा, फिर बना
है ये रिश्ता - "ज़िन्दगी " से सना ।

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