एक बसा हुआ संसार भी था
कुछ अपनों का प्यार भी था
तेरे चुने बनावटी रिश्तों का
एक सजा हुआ बाजार भी था !
सब कुछ तो था - बस तू ही ना था !!
थी कुछ इज़्ज़त
तिरस्कार भी था
सब कुछ तो था - बस तू ही ना था !!
मकान भी था
अख़राजात का इंतज़ाम भी था
सब कुछ तो था - बस तू ही ना था !!
भूत का बंधन , भविष्य की उलझन
पर तेरा वर्तमान न था
सब कुछ तो था - बस तू ही ना था !!
तब बात चली थी सपनों की
प्रेम था - प्रियतम भी था
सब कुछ तो था - बस तू ही ना था !!
मुस्कान रखी थी होठों पे
थी आँखें वेदना में डूबी
एक बेमन सा इंसान भी था
सब कुछ तो था - बस तू ही ना था !!
जब तन्हाई ने घेरा था
प्रिय ने तुमसे मुख मोड़ा था
तब दिशाहीन जब फिरते थे
मैं था तब भी तुमने सुना नहीं
खुद के संग रहना ही चुना नहीं
अब हुए मुखातिब मैं और तू
अब कुछ नहीं हैं ,
पर "तू " तो है ,
जो दरअसल मैं ही हूँ
तो अब सब कुछ है !!
पर "तू " तो है ,
जो दरअसल मैं ही हूँ
तो अब सब कुछ है !!
सब कुछ तो था - बस मैं ही ना था !!
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