सच, कुछ भी तो नहीं बदला है
तुम आज भी मेरे लिए अपने हिस्से के
चॉकलेट्स बचा के लाती हो
मैं भी तुम्हारे लिए 'मैसोर पाक '
'पेड़े' लाती हूँ - ऑफिस से।
रात को सोने के बाद,
तुम आज भी चादर फेंक देती हो
और मैं तुम्हें अब भी,
डांट के रोज़ ओढ़ाती रहती हूँ।
हाँ , बस हमारे पेशे ज़रूर बदल गए हैं
मैं तुम्हारे केमिस्ट्री के सवाल हल नहीं कर पाती
और तुम मुझसे सॉफ्टवेर के फंडे नहीं डिसकस कर पाती
तुमको टैक्सेज समझ नहीं आते
और मुझे इंवेस्टमेंट्स सोचनी पड़ती है।
पर हम आज भी शेर-ओ-शायरी, लिटरेचर ,
गाने और डांस के सब्जेक्ट साथ में पढ़ लेते हैं
मुझे अब फ़ैशन का शौक़ है,
स्टाइलिश कपडे अच्छे लगते हैं
तुम अब भी मेरे खरीदे हुए
शालीन कपड़ों में खुश रहती हो।
पर जब हम साथ में घूमना हो
दोनों बेब बन के ही निकलते हैं
तुम अब भी उतनी ही मासूम ,पाक. ,
दुनियादारी से अनछुई हो
और मैं - अब रम गई हूँ
पूरी तरह से इस जंजाल में।।
पर मैं आज भी अपनी सीख और डाँट से नवाज़ती रहती हूँ तुम्हें ,
क्या पता कब ज़रूरत पड़ जाये
क्या पता कब ज़रूरत पड़ जाये
मैं अब भी चिंता करती हूँ तुम कहाँ , कैसी हो
और आज भी मेरी पूँछ बन कर ही चलती हो
कभी तुम दीदी बन जाती हो
तो कभी मैं छोटी हो जाती हूँ
हो सकता है और भी लोग आ गए हों मेरी ज़िन्दगी में
मैं पहले से काफी बदल गई हूँ, लिबरल हो गई हूँ
हो सकता है मेरा वक़्त , मेरा प्यार थोड़ा बंटा सा लगे तुम्हें
पर तुम्हारा प्यार और तुम्हारा स्थान वहीँ है , वहीँ रहेगा
पर एक चीज़ तो नहीं बदलेगी
माँ की सगी बच्ची तो मैं ही रहूंगी - हमेशा !! : ) :-P
माँ की सगी बच्ची तो मैं ही रहूंगी - हमेशा !! : ) :-P
सच, कुछ भी तो नहीं बदला है , गुड़िया रानी !!
Loved it..specially the ending 😁😂
ReplyDeleteLoved it..specially the ending 😁😂
ReplyDeleteheheh .. wahi sach hai :D :)
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