Tuesday, 10 May 2016

कुछ बारिश सी हुई है।

इस  तपती ज़मीन पर 
वो आसमान जो आग उगलता था 
वो हवा  ज्वालामुखी से बह कर आती थी 
आज कुछ कम जल रही है।  

कुछ बारिश सी  हुई है।  



आज किस्मत ने कुछ बौछारें गिराई हैं 
वो  मन की पथराई ज़मीं पर 
सवालों की धूल में सनी हुई धुंधली राहों में  
एक साफ़ सड़क सी नज़र आई है 

कुछ बारिश सी  हुई है। 



थोड़ी शांति सी महसूस होती है 

संशय की परतों में एक फूंक पड़ी है शायद 
वो कल के बारे में डर अंधेरा सा था 
झरोखे से  एक ठंढी रौशनी में  सिमट रहा है 

कुछ बारिश सी  हुई है। 



आज फिर पुरानी टूटी कलम चली है 
सूखी सी श्याही में डूब कर 
कागज़ के सीने में चुपके से 
दिल से एक सांस कविता फूंकी है 

कुछ बारिश सी  हुई है। 


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