Tuesday, 4 August 2015

ठहरना ही नहीं आता !!

हमें चलने की जल्दी है  , 
ठहरना ही नहीं आता 
पहुँचने की है ख्वाहिश  यूँ  
टहलना भी नहीं आता  !!

नज़ारे लाख हों  गुलज़ार 
रोशन रहती है जो बहार 
जिसे मंज़िल की जल्दी है 
उसे रास्ता नहीं भाता !!


मिलते हैं मुसाफिर यूँ तो 

 हज़ारों चाँद तारों से 
जिसे चस्का सुबह  का हो 
वो रतिया भूल जाता है   !!


मक़सद यूँ पड़े भारी 

मुलाकातों के चिलमन पर 
मंज़िल हासिल जो होती है 
तो रिश्ते टूट जाते हैं  !!


हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी 

जो साँसों पर हुई भारी 
कि सपने देखने से पहले ही
निंदिया टूट जाती है  !!


नशे में होश पा लेना 

शराब -ए -ज़िन्दगी  तुझ में 
जिसे दिल की लगी है वो 
अक्सर सोना भूल जाते हैं   !!


मोहब्बत पे किताबें छापने को 
यूँ तो शायर कई बैठे
दिलों में झाँकने को जब कहा 
पसीने छूट जाते हैं   !! 

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