Wednesday, 24 December 2014

“दो-स्-ती की ज़-रू-र-त”

हाँ , सुन के अजीब तो लगता है , पर शायद ऐसी कोई चीज़ होती तो है |

 “दो-स्-ती की ज़-रू-र-त”

दोस्ती और प्यार के बारे में जितने भी किस्से लिखे/कहे जाएँ ,वो कभी पूरे नहीं हो सकते. शायद ये दोनों ही समय और परिस्थितियों के साथ इतने रूप लेते हुए इस तरह से evolve होते हैं कि किसी एक काल में इन्हें पूरी तरह से बयां कर पाना मुमकिन के पार है | दरअसल इन दोनों को एक नज़र से देख पाना भी बेमानी होगी | इसलिए अभी दोस्ती पर ही फोकस करते हैं |

 मैं उन लोगों में से हूँ जो ये मानते और जानते हैं कि हम दोस्त नहीं बनाते ... दोस्ती अपने लिए कुछ इंसानों को खुद चुनती है .. जिनसे उसे कुछ उम्मीदें, कुछ महत्वाकांक्षाए होती हैं| कम से कम मेरे साथ तो यही हुआ था | मेरे दोस्तों ने मुझे चुना था , दोस्ती के लिए | ये वो प्राणी थे जिन्होंने जाने कैसे मेरे tough surface के भीतर के molten crust को पहचान लिया था | इतना ही नहीं, ये वही लोग थे जिन्होंने कभी भी give-up नहीं किया मुझ पर | तब भी नहीं जब मैं उन लोगों से हमेशा दूर जाने की कोशिश करती थी .. जान बूझ कर .. ये सोच कर कि ये मुझे मेरे लक्ष्य से भटका सकते हैं .. मैं भी इनके मोह में पड़ के अपने को दुखी ही करुँगी .. आखिर साथ कौन ही रह पता है .. एक दिन तो सब ही अलग हो जाते हैं |
इस अलग होने के डर की वजह से मैं लोगों के आस पास जाना भी prefer नहीं करती थी | ये वो लोग थे जिन्होंने फिर भी मेरा पीछा नहीं छोड़ा और मेरे दोस्त बन गए
इन्होने मुझे दोस्ती के fundey सिखाये, साथ का मतलब बताया .. साथ quality moments create किये और एक दुसरे के लिए सबसे लड़ाई भी करी | कोई भी लड़ाई उसकी या मेरी नहीं थी .. हर लड़ाई अपनी थी |
साथ की इतनी आदत पड़ी कि अलग रहने से और अकेले रहने से डर सा लगने लगा | नौकरी भी कुछ चहीतों के साथ करने का मौका मिल गया | लगा कि कोई अजूबी ख़ुशी और पुण्य का फल मिल गया | इतने प्यार के side-effects भी हैं | आप में घमंड आ जाता है .. आप ये समझते हो कि इतने उम्दा , प्यार करने वाले लोग आपकी ज़िन्दगी में हैं .. आपको किसी और की क्या ज़रूरत | आप ये सोचते हो - बेचारे वो लोग जो आपकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं .. अकेले होंगे , उनके आप के जैसे महान दोस्त नहीं होंगे .. इसलिए वो आपको approach कर रहे हैं |
. आप मन ही मन सोचते हो कि आप कितने लकी हो जो आपके पास इतने अच्छे दोस्त हैं और आप इसी घमंड में अचानक लोगों से दोस्ती करना छोड़ देते हो | आप समझते हो कि ये जो प्यार या कनेक्शन (so called) आपके बीच है वो अब आजीवन रहने वाला है | .. किसी भी कारण से ये आपसे दूर नहीं जाएगा | पर तभी आपके साथ एक गेम हो जाता है .. जिसे कहते हैं – “ ज़िन्दगी ” !!

 आप भी कितने बेवक़ूफ़ थे .. आप समझते रहे थे की ज़िन्दगी आपके लिए same privileges situation हमेशा बना के रखेगी ?? भला आज तक कभी हुआ है ऐसा ? लोग आगे बढ़ते हैं .. और उनकी ज़िन्दगी भी .. शायद दोस्ती तो कहीं पीछे छूट जाती है .. मैं ये नहीं कहती कि वो ये जानबूझ के करते हैं .. पर शायद इतने सारे लोग ऐसा ही करते हैं कि इसको जीवन का एक स्टैण्डर्ड नियम मान लेना ही एक मात्र विकल्प लगता है |

वो ज़िन्दगी की race में अपने बहोत सारे महत्वपूर्ण पात्र अदा करते हुए .. आदर्शों को हासिल करते हुए .. काफी आगे निकल जाते हैं | उनके लिए इन सभी रिश्तों में शायद सबसे सहज दोस्ती को कुर्बान करना ही सही लगता है | नहीं नहीं .. मैं इस ideology से agree नहीं कर रही ... बस उनकी so called बेबसी बयां कर रही हूँ .. वो बेबसी जो वो बड़ी ही सहेजता से बयां करते हैं | सिर्फ बातों में नहीं अपने कर्मों में भी वही करते हैं |

शुरू में आप कई बार वो पुराना हक या उसके कुछ bargained अवशेष पे settle down करने की कोशिश करते हैं | कभी लड़ाइयाँ करते , तो कभी मनाते हुए , आप तब तक कोशिश करते हैं जब तक आपको अपनी पुराने ‘कनेक्शन’ पे यकीन होता है | कभी जब विश्वास हल्का होता हुआ लगता था .. तो आप वो तमाम वक़्त याद करते हैं जब वो आपके साथ खड़े थे | पर कब तक ही जल सकती है एक शमा .. कभी न कभी तो वो टेस्ट में fail होनी है|
और फिर एक दिन आपको शक उत्पन्न होता है उस कनेक्शन पे जिसके वजह सी आज तक आप दूरियों पे settle-down कर रहे थे | जब आप ये सोचते थे की हमारी एहमियत कम हुई है पर ख़तम नहीं हुई अभी उनकी ज़िन्दगी में |
धीरे धीरे आपका ये विश्वास भी साथ छोड़ने लगता है .. और आपको समझ पाते हैं कि चीजें अब बदल चुकी हैं | जब उन्हें आपके basic नेचर से परेशानी होने लगे, जिसके साथ उन्होंने सबसे पहले adjust किया था , तब आपको जाग जाना चाहिए | हालाँकि ये बहोत tough decision है .. पर तब आपको पीछे हट जाना चाहिए |
 शायद यही ठीक है .. so called प्रकृति का नियम .. जिसमें आपको भी प्यार और दोस्ती को एक परिवर्तनशील वस्तु की उपाधि दे कर, अपने अति संवेदनशील कवि मन को ये समझा देना चाहिए कि - उन्हें अब आपकी दोस्ती की ज़रूरत नहीं !
उनके पास उनके जीवनसाथी का प्यार है और शायद अब उनको दोस्तों के प्यार की कमी नहीं महसूस होती है. अगर उनको कुछ चाहिए तो बस दुनियादारी बतियाने वाले चार gossip kings/queens जिसके उनके जीवन में कभी कोई कमी नहीं थी|

वो खुश हैं .. आप भी ज़बरदस्ती, कम से कम उम्मीद लगा कर खुद को दुखी तो मत करिए. आज़ाद कर दीजिये उन्हें, और खुद को भी |

ये कहना शायद इतना आसान न होता अगर आज हम अपनी माँ के पास अपने घर पे बैठ के इस फैसले पर नहीं पहुँच रहे होते | आखिर वो भी तो हमारे बिना अकेले रह रही हैं | उनका प्यार और उनका दुःख दोनों ही हमसे कहीं ज्यादा है |

#nothing_personal_all_buisness #nothing_buisness_all_personal
 #Life
#दुनियादारी
#Fakeism/Stereotypes #real_me_in_unreal_times
#friendship_love
#Change_is_nature

No comments:

Post a Comment